Nitish Kumar Winning : Introduction
Nitish Kumar has once again achieved a sweeping victory in Bihar. The NDA coalition secured a massive mandate, surprising political observers. Despite serving as Chief Minister for nearly 20 years, people continue to trust him. Posters outside the JD(U) office read: “Tiger abhi zinda hai.” This raises an important question: Why does Nitish Kumar keep winning in Bihar?

नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार में भारी जीत हासिल की है। एनडीए गठबंधन को बड़ा जनादेश मिला, जिसने कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया। लगभग 20 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद जनता उन पर भरोसा करती है। जदयू कार्यालय के बाहर पोस्टर लगे थे: “टाइगर अभी जिंदा है।” यह एक बड़ा सवाल उठाता है: नीतीश कुमार बार-बार बिहार में क्यों जीतते हैं?
Nitish Kumar’s Journey: From Early Life to Political Power (नीतीश कुमार की यात्रा: शुरुआती जीवन से राजनीतिक शक्ति तक)
Nitish Kumar was born in 1951 in Bihar’s Nalanda district. Influenced by socialist leaders like Ram Manohar Lohia and Karpoori Thakur, he developed strong political convictions early in life.
नीतीश कुमार का जन्म 1951 में बिहार के नालंदा जिले में हुआ। राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसे समाजवादी नेताओं से प्रेरित होकर उन्होंने कम उम्र में ही राजनीतिक विचार विकसित किए।
Starting in Politics
His political journey began with the Janata Movement after the Emergency in 1977. The movement reshaped Indian politics, and Nitish Kumar entered the scene during this period. His early years were challenging, losing two elections from Harnaud. His breakthrough came in 1985 when he won and became an MLA, later entering the Lok Sabha and beginning his national political career.
उनकी राजनीतिक शुरुआत 1977 की इमरजेंसी के बाद हुए जनता आंदोलन से हुई। इस आंदोलन ने भारतीय राजनीति को बदल दिया और इसी समय नीतीश राजनीतिक मंच पर आए। शुरुआत में उन्होंने दो बार हर्नौत से चुनाव हारा, लेकिन 1985 में उन्होंने जीतकर विधायक बने। बाद में वे लोकसभा भी पहुंचे और राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया।
The Rise of the Samata Party and JD(U)
In 1994, Nitish Kumar co-founded the Samata Party with George Fernandes, marking a turning point. The Janata Dal split in 1999, resulting in the formation of JD(U). This gave Nitish a new platform, attracting voters who were dissatisfied with Lalu Prasad Yadav’s RJD.
1994 में नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई, जो उनके करियर का बड़ा मोड़ था। 1999 में जनता दल टूट गया और जदयू का गठन हुआ। इससे नीतीश को एक नया मंच मिला, जिसने आरजेडी से नाराज़ मतदाताओं को आकर्षित किया।
First Term as Chief Minister in 2005
Bihar’s 2005 elections changed the political landscape. A hung assembly led to President’s Rule. In the re-election, JD(U) and BJP formed a strong coalition and Nitish Kumar became Chief Minister, ending years of RJD dominance. This marked the beginning of a new governance era in Bihar.
2005 के चुनावों ने बिहार की राजनीति बदल दी। पहली बार विधानसभा लटक गई और राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। दोबारा चुनाव में जदयू-भाजपा गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की। नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने और आरजेडी के लंबे शासन का अंत हुआ। यह बिहार में शासन का नया दौर था।
The “Sushasan Babu” Governance Model (“सुशासन बाबू” मॉडल)
Improving Law and Order
Bihar was once infamous for “Jungle Raj,” marked by crime, kidnappings and fear. Nitish Kumar prioritised law and order, introduced police reforms and set up fast-track courts. Crime fell significantly, earning him the reputation of “Sushasan Babu.”
बिहार कभी “जंगल राज” के लिए बदनाम था, जहां अपराध, अपहरण और डर का माहौल था। नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी, पुलिस सुधार किए और फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए। अपराध में कमी आई और उन्हें “सुशासन बाबू” की छवि मिली।
Driving Infrastructure Development
Nitish Kumar heavily invested in roads, bridges, electricity and irrigation. Bihar’s road network, once considered among the worst, saw major improvements. These visible changes helped people associate his governance with progress.
नीतीश कुमार ने सड़कों, पुलों, बिजली और सिंचाई में भारी निवेश किया। कभी बिहार की सड़कें सबसे खराब मानी जाती थीं, लेकिन उनके शासन में कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इन बदलावों ने जनता के मन में विकास की छवि मजबूत की।
Social Welfare Initiatives
Social schemes like free bicycles for schoolgirls boosted female education. The controversial alcohol ban received strong support from women, who suffered due to alcohol abuse at home. These welfare steps helped him gain a solid support base among women voters.
स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मुफ्त साइकिल योजना ने शिक्षा को बढ़ावा दिया। विवादित शराबबंदी को महिलाओं का भारी समर्थन मिला, क्योंकि शराब के कारण घरों में परेशानी बढ़ती थी। इन योजनाओं ने महिला मतदाताओं में उनका समर्थन मजबूत किया।
Strategic Alliance Building (रणनीतिक गठबंधन राजनीति)
Cultivating a Broad Caste Coalition
Caste remains a powerful political factor in Bihar. Nitish Kumar’s core support comes from Kurmis and EBCs. By allying with BJP, he also attracted upper-caste voters. His wide social coalition helped him outmaneuver RJD’s Yadav-centric vote base.
बिहार की राजनीति में जाति अभी भी अहम भूमिका निभाती है। नीतीश का मूल समर्थन आधार कुर्मी और ईबीसी समुदाय हैं। भाजपा के साथ गठबंधन ने उन्हें सवर्ण मतदाताओं का समर्थन भी दिलाया। यह व्यापक सामाजिक गठबंधन आरजेडी के यादव-केंद्रित वोट बैंक पर भारी पड़ा।
Recent Election Strategy
Before the latest election, he introduced schemes like free electricity units, financial assistance for women and skill development programs. These initiatives strengthened his support among women and lower-income communities, contributing to his recent victory.
हालिया चुनाव से पहले उन्होंने मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता और कौशल विकास जैसी योजनाएं शुरू कीं। इससे महिलाओं और गरीब समुदायों में उनका समर्थन बढ़ा और यह उनकी हालिया जीत का बड़ा कारण बना।
A Legacy of Longevity(लंबे राजनीतिक करियर की विरासत)
With nearly 20 years as Chief Minister, Nitish Kumar is among the longest-serving leaders in India. If he completes another five years, he could surpass Naveen Patnaik and challenge the all-time record held by Pawan Kumar Chamling. Questions remain about whether the BJP may replace him later, but for now, his political longevity is unmatched.
लगभग 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश कुमार भारत के सबसे लंबे कार्यकाल वाले नेताओं में शामिल हैं। यदि वे अगले पांच साल पूरे करते हैं, तो वे नवीन पटनायक को पीछे छोड़ सकते हैं और पवन कुमार चामलिंग के रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकते हैं। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि क्या भाजपा भविष्य में नेतृत्व बदलेगी, लेकिन अभी उनकी राजनीतिक लंबी उम्र का कोई मुकाबला नहीं।
Nitish Kumar : Conclusion
Nitish Kumar’s continued success comes from a combination of governance, social engineering and strategic politics. His brand of “Sushasan Babu,” support among women, caste-coalition building and weak opposition have helped him remain dominant in Bihar politics for two decades.
नीतीश कुमार की लगातार सफलता सुशासन, सामाजिक संतुलन और रणनीतिक राजनीति का मिश्रण है। “सुशासन बाबू” की उनकी छवि, महिलाओं का समर्थन, जातीय समीकरण और कमजोर विपक्ष ने उन्हें दो दशकों तक बिहार की राजनीति में मजबूत बनाए रखा।