Indian Army–Air Force Laser Defence Introduction: The Rising Drone Threat
Hindi:
आज की जंग में ड्रोन सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। दुश्मन देश सरहदों पर ड्रोन भेजकर हमले की कोशिश करते हैं। भारत पर भी ऐसे खतरे बढ़े हैं, इसलिए भारतीय सेना और वायुसेना अब 16 स्वदेशी लेजर आधारित सिस्टम को शामिल करने जा रही हैं। यह सिस्टम दुश्मन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर देते हैं और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

English:
Drones dominate modern battlefields. Enemy states use them for surveillance and attacks. India faces the same rising threat. To counter this, the Indian Army and Air Force plan to induct 16 indigenously developed laser-based weapon systems. These systems can destroy enemy drones mid-air, marking a major leap toward defence self-reliance.
Why Anti-Drone Systems Are Now Essential
Hindi:
आज ड्रोन सस्ते, खतरनाक और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले हथियार बन चुके हैं। मिसाइलों से उन्हें गिराना महंगा पड़ता है, और बड़े स्वॉर्म अटैक रोकना मुश्किल होता है। इसलिए एंटी-ड्रोन सिस्टम अब भारत की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी तकनीक बन चुके हैं।
English:
Drones have become cheap, powerful and widely-used weapons. Shooting them down with missiles is too expensive, and stopping swarm attacks is even harder. This makes anti-drone systems essential for India’s border security and critical infrastructure protection.
IDDD&IS MK2: India’s Leap in Atmanirbhar Defence Tech
Hindi:
भारत ने Integrated Drone Detection and Interdiction System (IDDD&IS MK2) खुद विकसित किया है। यह लेजर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मिश्रण है। इसका 10 kW लेजर दो किलोमीटर दूर तक ड्रोन को जलाने की क्षमता रखता है, और भविष्य के अपग्रेड इसे 30 kW और 5 किमी तक बढ़ाएंगे।
English:
India’s Integrated Drone Detection and Interdiction System (IDDD&IS) MK2 is fully indigenous. It combines laser technology with AI-driven threat analysis. Its 10 kW laser can destroy drones at 2 km, and future upgrades will raise it to 30 kW with a 5 km engagement range.
Component 1: Multi-Sensor Detection
Hindi:
ड्रोन पकड़ना मुश्किल काम है क्योंकि उनका रडार सिग्नेचर बहुत कम होता है। इसके लिए छोटे रडार, RF सेंसर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे और इंफ्रारेड कैमरे मिलकर 360-डिग्री निगरानी करते हैं। इससे किसी भी दिशा से आने वाला ड्रोन तुरंत पहचान में आ जाता है।
English:
Drones are hard to detect due to their low radar signature. This system uses short-range radars, RF sensors, electro-optical cameras, and infrared imaging to maintain 360-degree surveillance. Together, they identify incoming drones in real time.
Component 2: Command, Control and Sensor Fusion
Hindi:
कई सेंसर का डेटा एक साथ आने पर सिस्टम इसे फ्यूज़ करता है और AI से खतरे का स्तर तय करता है। Central Battle Management System पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करता है और जरूरत पड़ने पर सिस्टम खुद भी फायर कर सकता है।
English:
The system fuses data from multiple sensors and uses AI to determine the threat level. The Central Battle Management System manages the operation and can even auto-engage if required.
Component 3: Soft Kill Options – Jamming and Spoofing
Hindi:
हर ड्रोन को मारना जरूरी नहीं। पहले उसे जाम किया जाता है। RF जामिंग ड्रोन की कम्युनिकेशन तोड़ देती है और GPS स्पूफिंग उसे गलत दिशा में भेज देती है। यह तरीका चुपचाप, बिना नुकसान के खतरा खत्म करता है।
English:
Not every drone needs to be destroyed. Soft-kill methods like RF jamming disrupt communication links, while GPS spoofing misguides the drone. These methods neutralize threats silently and safely.
Component 4: Hard Kill – The 10 kW Laser Weapon
Hindi:
अगर जामिंग काम न करे तो लेजर तुरंत हमला करता है। 10 kW लेजर कुछ सेकंड में ड्रोन की बैटरी, मोटर या पंख पिघला देता है। इसकी स्पीड रोशनी के बराबर होती है, इसलिए प्रतिक्रिया तुरंत होती है।
English:
When soft-kill fails, the 10 kW laser attacks instantly. It melts a drone’s motor, battery, or propellers within seconds. Since lasers travel at the speed of light, engagement is immediate.
Why Lasers Are Cheaper and More Efficient
Hindi:
मिसाइल से एक ड्रोन गिराना लाखों में पड़ता है, लेकिन लेजर सिर्फ बिजली खर्च करता है। यह तेज़, सटीक और अनलिमिटेड शॉट्स देता है। छोटे ड्रोन जिन्हें पकड़ना मुश्किल होता है, लेजर उनके लिए सबसे सटीक हथियार है।
English:
Missiles cost massive amounts per shot, while lasers only consume electricity. They are faster, more precise and provide unlimited firing capacity. For small drones, lasers are the most efficient weapon.
Strategic Deployment Across India
Hindi:
ये सिस्टम सबसे पहले पंजाब और जम्मू-कश्मीर में लगाए जाएंगे, जहाँ ड्रोन सबसे ज्यादा पकड़े जाते हैं। एयरबेस, पावर प्लांट, तेल डिपो और दिल्ली जैसे शहरों की सुरक्षा में भी इसका इस्तेमाल होगा।
English:
These systems will be deployed first in Punjab and Jammu & Kashmir, where drone intrusions are frequent. They will also guard airbases, power plants, ammunition depots, and major cities like Delhi.
Challenges and Limitations
Hindi:
बारिश, धुंध, धूल और धुआं लेजर की क्षमता घटा देते हैं। ड्रोन बादलों में छिपकर बच सकते हैं। लेजर को बहुत बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है, और तेज़ी से घूमने वाले ड्रोन को ट्रैक करना चुनौती है।
English:
Rain, fog, dust and smoke reduce laser performance. Drones can hide inside clouds. Lasers need high power and cooling, and tracking fast-moving drones remains challenging.
Part of India’s Layered Air Defence
Hindi:
लेजर अकेला समाधान नहीं। इसे जामर, मिसाइल, माइक्रो-म्यूनिशन और गन सिस्टम के साथ मिलाकर लेयर्ड डिफेंस बनाया जाएगा। कई लेयर होने से एक सिस्टम के फेल होने पर दूसरा खतरे को रोक लेता है।
English:
Lasers are not a standalone solution. They will work alongside jammers, missiles, micro-munitions, and gun systems. Layered defence ensures that even if one system fails, others can still intercept the threat.
Indian Army–Air Force Laser Defence Conclusion: India Steps Into the Future of Warfare
Hindi:
16 स्वदेशी लेजर सिस्टम भारत की रक्षा में बड़ा मोड़ साबित होंगे। यह दिखाता है कि भारत अब मिसाइलों से आगे निकलकर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन की दुनिया में दाखिल हो चुका है। यह आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और आधुनिक युद्ध की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
English:
The induction of 16 indigenous laser systems marks a major milestone in India’s defence modernization. India is moving beyond missile-based defence and entering the era of directed-energy weapons. It is a landmark step in self-reliance and future warfare readiness.